शास्त्रीय परिभाषा
सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाला योग
सर्वार्थसिद्धि योग तब बनता है जब चंद्रमा विशेष नक्षत्रों में उनके अनुकूल वार को हो। इसका नाम ही इसकी व्यापकता बताता है: सर्व (सभी), अर्थ (प्रयोजन/धन), सिद्धि (सिद्धि)। जब यह संयोग होता है तो वैदिक परम्परा कहती है कि इस काल में आरम्भ किया गया कोई भी शुभ कार्य ब्रह्माण्डीय काल के पूर्ण समर्थन से सम्पन्न होता है।
अनेक मुहूर्त योगों के विपरीत जो केवल विशिष्ट कार्यों के लिए शुभ हैं, सर्वार्थसिद्धि को शास्त्रों में सार्वभौमिक रूप से उपयोगी बताया गया है — यही इसे वैदिक काल-चयन पद्धति में सर्वाधिक मूल्यवान बनाता है।
शास्त्रीय स्रोत
श्लोक · Shloka
भानुवारे तु हस्तोऽश्विन्युत्तरात्रितयं मूलम्।
सोमे श्रवणानुराधा मृगरोहिणीपुनर्वसवः॥
— मुहूर्त चिंतामणि, योग प्रकरण
“रविवार को: हस्त, अश्विनी, तीन उत्तरा नक्षत्र (उत्तर फाल्गुनी, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद) और मूल। सोमवार को: श्रवण, अनुराधा, मृगशिरा, रोहिणी और पुनर्वसु…”
वैदिक दृष्टि में काल स्वयं ब्रह्म है (काल ब्रह्मन्)। सर्वार्थसिद्धि उस क्षण को दर्शाती है जब वार के ग्रह और चंद्र नक्षत्र का सामंजस्य होता है — एक ऐसी खिड़की जिसमें मनुष्य की इच्छाएँ ब्रह्माण्ड की लय के साथ जुड़ जाती हैं।
निर्माण नियम
सर्वार्थसिद्धि योग कैसे बनता है
वार–नक्षत्र मैट्रिक्स
वार × नक्षत्र संयोग
मुहूर्त चिंतामणि · जातक पारिजात · कल्पद्रुम के आधार पर
| वार | शुभ नक्षत्र |
|---|---|
रविवार Sunday | अश्विनीAshwini हस्तHasta उत्तरफाल्गुनीUttara Phalguni उत्तराषाढ़ाUttara Ashadha उत्तरभाद्रपदाUttara Bhadrapada मूलMoola |
सोमवार Monday | रोहिणीRohini मृगशिराMrigashira अनुराधाAnuradha श्रवणShravana |
मंगलवार Tuesday सीमित | कृत्तिकाKrittika आश्लेषाAshlesha उत्तरभाद्रपदाUttara Bhadrapada |
बुधवार Wednesday | रोहिणीRohini मृगशिराMrigashira कृत्तिकाKrittika हस्तHasta अनुराधाAnuradha |
गुरुवार Thursday | पुनर्वसुPunarvasu पुष्यPushya अश्विनीAshwini अनुराधाAnuradha रेवतीRevati |
शुक्रवार Friday | पुनर्वसुPunarvasu अश्विनीAshwini अनुराधाAnuradha श्रवणShravana रेवतीRevati |
शनिवार Saturday सीमित | रोहिणीRohini स्वातीSwati श्रवणShravana |
आगामी सर्वार्थसिद्धि तिथियाँ
स्विस एफेमेरिस · लाहिरी अयनांश · नई दिल्ली (28.61°N, 77.21°E)
45 दिनों में 9 आगामी संयोगों में से 6 दिखाए जा रहे हैं
शुभ कार्य · Shubha Karya
शुभ कार्यों की सूची
- ▸कम्पनी पंजीकरण
- ▸साझेदारी समझौते
- ▸नया व्यवसाय प्रारम्भ
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- ▸विश्वविद्यालय प्रवेश
- ▸पाठ्यक्रम नामांकन
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- ▸मंदिर प्रतिष्ठा
- ▸पूजा आरम्भ
- ▸शुभ यात्रा प्रारम्भ
- ▸व्यापारिक यात्रा
- ▸तीर्थयात्रा
- ▸स्थानांतरण
सावधानी · Precautions
सीमाएँ एवं वर्जित कार्य
मंगलवार
Tuesday — Mangala Vara
- ✕दीर्घकालीन वित्तीय अनुबंध
- ✕विवाह समारोह
- ✕शान्तिपूर्ण/कूटनीतिक वार्ता
- ✕मेल-मिलाप की यात्रा
मंगल मंगलवार का स्वामी है। सर्वार्थसिद्धि सामान्य शुभता देती है, किंतु मंगल ऊर्जा मार्स-स्वभाव के कार्यों को तीव्र करती है। शान्त और गृहस्थ कार्य टालना बेहतर।
शनिवार
Saturday — Shani Vara
- ✕नया व्यवसाय आरम्भ (सोम/गुरु/शुक्र श्रेष्ठ)
- ✕विवाह और सगाई
- ✕बड़े चिकित्सीय उपचार
- ✕नई साधना प्रारम्भ
शनि वार सर्वार्थसिद्धि श्रम और नींव कार्यों के लिए शुभ है, किंतु शास्त्र उत्सवों से बचने की सलाह देते हैं, क्योंकि शनि की ऊर्जा उत्सव से अधिक धैर्य को बढ़ावा देती है।
सामान्य
General Precautions
- ✕लग्न कुण्डली स्वतंत्र रूप से देखें
- ✕योग खिड़की में राहुकाल से बचें
- ✕मृत्यु योग की सहवर्तिता जाँचें
- ✕चंद्रमा अस्त न हो — सत्यापित करें
सर्वार्थसिद्धि आधारभूत योग है, सर्वोपरि गारंटी नहीं। शास्त्रीय मुहूर्त में तिथि, करण, 27-विध योग, होरा और लग्न का भी विचार होता है। इसे प्राथमिक फिल्टर के रूप में प्रयोग करें।
योग तुलना
प्रमुख मुहूर्त योगों की तुलना
| योग | आधार | अवधि | श्रेष्ठ कार्य | आवृत्ति |
|---|---|---|---|---|
| सर्वार्थसिद्धियह पृष्ठ | चंद्रमा विशेष नक्षत्र में अनुकूल वार पर | सूर्योदय → नक्षत्र निकास | सभी उद्देश्य | 4–6× / माह |
| अमृतसिद्धि | चंद्रमा विशेष नक्षत्र में अनुकूल वार पर (भिन्न मैट्रिक्स) | सूर्योदय → नक्षत्र निकास | स्वास्थ्य, आध्यात्म | 4–6× / माह |
| रवि योग | चंद्रमा वार स्वामी के स्वनक्षत्र में उसी वार | सूर्योदय → नक्षत्र निकास | शासन, सरकार, सौर | 1–2× / माह |
| अभिजित मुहूर्त | दिन का 8वाँ मुहूर्त (मध्याह्न ~48 मिनट) | ~24–48 मिनट दैनिक | शीघ्र आरम्भ | प्रतिदिन (बुध छोड़कर) |
| गुरु पुष्य | चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में गुरुवार को | सूर्योदय → पुष्य निकास | शिक्षा, स्वर्ण, धन | ~1× / माह |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शास्त्रीय प्रश्नोत्तर
सर्वार्थसिद्धिः सर्वदा
सदा सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हों
सर्वार्थसिद्धि योग हमें स्मरण कराता है कि ब्रह्माण्ड स्वयं अवसर की खिड़कियाँ बनाता है — वे क्षण जब ग्रहों की शक्तियाँ हमारे प्रयासों का समर्थन करने के लिए एक-रेखीय हो जाती हैं। काल को समझकर और शुभ समय में कार्य आरम्भ करके हम प्राचीन वैदिक मुहूर्त शास्त्र में वर्णित काल-नृत्य के सचेत सहभागी बनते हैं।
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