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मुहूर्त योग · Muhurta Yoga

सर्वार्थसिद्धि योग

SARVARTHASIDDHI YOGA

✦ ✦ ✦

“भानुवारे तु हस्तोऽश्विन्युत्तरात्रितयं मूलम्।”
“सोमे श्रवणानुराधा मृगरोहिणीपुनर्वसवः॥”

— मुहूर्त चिंतामणि, योग प्रकरण

अगला योग: Saturday, 9 May 2026 · श्रवण · 05:3419:01
सर्व
Sarva
सब · सम्पूर्ण · समस्त
अर्थ
Artha
प्रयोजन · अर्थ · सम्पत्ति
सिद्धि
Siddhi
सिद्धि · परिपूर्णता · प्राप्ति
योग
Yoga
मिलन · शुभ संयोग · विन्यास

शास्त्रीय परिभाषा

सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाला योग

सर्वार्थसिद्धि योग तब बनता है जब चंद्रमा विशेष नक्षत्रों में उनके अनुकूल वार को हो। इसका नाम ही इसकी व्यापकता बताता है: सर्व (सभी), अर्थ (प्रयोजन/धन), सिद्धि (सिद्धि)। जब यह संयोग होता है तो वैदिक परम्परा कहती है कि इस काल में आरम्भ किया गया कोई भी शुभ कार्य ब्रह्माण्डीय काल के पूर्ण समर्थन से सम्पन्न होता है।

अनेक मुहूर्त योगों के विपरीत जो केवल विशिष्ट कार्यों के लिए शुभ हैं, सर्वार्थसिद्धि को शास्त्रों में सार्वभौमिक रूप से उपयोगी बताया गया है — यही इसे वैदिक काल-चयन पद्धति में सर्वाधिक मूल्यवान बनाता है।

शास्त्रीय स्रोत

मुहूर्त चिंतामणि — योग प्रकरण
जातक पारिजात — मुहूर्त अध्याय
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — मुहूर्त फल
कल्पद्रुम — वार-नक्षत्र योग विचार
धर्मसिंधु — शुभ मुहूर्त प्रकरण

श्लोक · Shloka

भानुवारे तु हस्तोऽश्विन्युत्तरात्रितयं मूलम्।
सोमे श्रवणानुराधा मृगरोहिणीपुनर्वसवः॥

— मुहूर्त चिंतामणि, योग प्रकरण

“रविवार को: हस्त, अश्विनी, तीन उत्तरा नक्षत्र (उत्तर फाल्गुनी, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद) और मूल। सोमवार को: श्रवण, अनुराधा, मृगशिरा, रोहिणी और पुनर्वसु…”

वैदिक दृष्टि में काल स्वयं ब्रह्म है (काल ब्रह्मन्)। सर्वार्थसिद्धि उस क्षण को दर्शाती है जब वार के ग्रह और चंद्र नक्षत्र का सामंजस्य होता है — एक ऐसी खिड़की जिसमें मनुष्य की इच्छाएँ ब्रह्माण्ड की लय के साथ जुड़ जाती हैं।

निर्माण नियम

सर्वार्थसिद्धि योग कैसे बनता है

I
प्राथमिक नियम

सूर्योदय नक्षत्र

स्थानीय सूर्योदय के समय चंद्रमा निर्धारित नक्षत्रों में से किसी एक में होना चाहिए। वार (Weekday) भी इसी सूर्योदय क्षण से निर्धारित होता है — वैदिक परम्परा के अनुसार।

II
अवधि नियम

अवधि का विचार

यह योग सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के वैध नक्षत्र से बाहर निकलने तक, या सूर्यास्त तक — जो भी पहले हो — प्रभावी रहता है। 3 घटी (72 मिनट) से अधिक अवधि वाला योग मुहूर्त के लिए उपयोगी माना जाता है।

III
वैकल्पिक संवर्धन

घटी/मुहूर्त गणना

जब सर्वार्थसिद्धि कम से कम 1 मुहूर्त (48 मिनट) तक रहे, इसे अनुकूल लग्न के साथ मिलाकर मिश्रित मुहूर्त बनाया जा सकता है। मुहूर्त चिंतामणि में तीन या अधिक घटी की अवधि को आदर्श माना गया है।

वार–नक्षत्र मैट्रिक्स

वार × नक्षत्र संयोग

मुहूर्त चिंतामणि · जातक पारिजात · कल्पद्रुम के आधार पर

वारशुभ नक्षत्र
रविवार
Sunday
अश्विनीAshwini
हस्तHasta
उत्तरफाल्गुनीUttara Phalguni
उत्तराषाढ़ाUttara Ashadha
उत्तरभाद्रपदाUttara Bhadrapada
मूलMoola
सोमवार
Monday
रोहिणीRohini
मृगशिराMrigashira
अनुराधाAnuradha
श्रवणShravana
मंगलवार
Tuesday
सीमित
कृत्तिकाKrittika
आश्लेषाAshlesha
उत्तरभाद्रपदाUttara Bhadrapada
बुधवार
Wednesday
रोहिणीRohini
मृगशिराMrigashira
कृत्तिकाKrittika
हस्तHasta
अनुराधाAnuradha
गुरुवार
Thursday
पुनर्वसुPunarvasu
पुष्यPushya
अश्विनीAshwini
अनुराधाAnuradha
रेवतीRevati
शुक्रवार
Friday
पुनर्वसुPunarvasu
अश्विनीAshwini
अनुराधाAnuradha
श्रवणShravana
रेवतीRevati
शनिवार
Saturday
सीमित
रोहिणीRohini
स्वातीSwati
श्रवणShravana
पंचांग इंजन से सीधे

आगामी सर्वार्थसिद्धि तिथियाँ

स्विस एफेमेरिस · लाहिरी अयनांश · नई दिल्ली (28.61°N, 77.21°E)

Saturday, 9 May 2026
शनिवार · Saturday
श्रवणShravana
05:3419:01·13.4 घं
Thursday, 14 May 2026
गुरुवार · Thursday
रेवतीRevati
05:3119:04·13.5 घं
Friday, 15 May 2026
शुक्रवार · Friday
अश्विनीAshwini
05:3019:04·13.6 घं
Monday, 18 May 2026
सोमवार · Monday
मृगशिराMrigashira
05:2819:06·-10.4 घं
Sunday, 24 May 2026
रविवार · Sunday
उत्तरफाल्गुनीUttara Phalguni
05:2519:10·-10.3 घं
Friday, 5 June 2026
शुक्रवार · Friday
श्रवणShravana
05:2219:16·-10.1 घं

45 दिनों में 9 आगामी संयोगों में से 6 दिखाए जा रहे हैं

शुभ कार्य · Shubha Karya

शुभ कार्यों की सूची

व्यापार
Business
  • कम्पनी पंजीकरण
  • साझेदारी समझौते
  • नया व्यवसाय प्रारम्भ
  • व्यापार अनुबंध
शिक्षा
Education
  • विद्यारम्भ संस्कार
  • विश्वविद्यालय प्रवेश
  • पाठ्यक्रम नामांकन
  • कौशल प्रशिक्षण
वित्त
Finance
  • निवेश
  • बैंक खाता खोलना
  • वित्तीय समझौते
  • बीमा
सम्पत्ति
Property
  • क्रय और पंजीकरण
  • निर्माण आरम्भ
  • सम्पत्ति समझौते
  • भूमि अधिग्रहण
वाहन
Vehicles
  • नया वाहन खरीदना
  • प्रथम यात्रा
  • वाहन पंजीकरण
  • वाहन बेड़ा विस्तार
विवाह
Marriage
  • सगाई समारोह
  • विवाह पंजीकरण
  • विवाह योजना
  • अंगूठी समारोह
आध्यात्म
Spiritual
  • दीक्षा
  • मंत्र जप प्रारम्भ
  • मंदिर प्रतिष्ठा
  • पूजा आरम्भ
यात्रा
Travel
  • शुभ यात्रा प्रारम्भ
  • व्यापारिक यात्रा
  • तीर्थयात्रा
  • स्थानांतरण

सावधानी · Precautions

सीमाएँ एवं वर्जित कार्य

मंगलवार

Tuesday — Mangala Vara

  • दीर्घकालीन वित्तीय अनुबंध
  • विवाह समारोह
  • शान्तिपूर्ण/कूटनीतिक वार्ता
  • मेल-मिलाप की यात्रा

मंगल मंगलवार का स्वामी है। सर्वार्थसिद्धि सामान्य शुभता देती है, किंतु मंगल ऊर्जा मार्स-स्वभाव के कार्यों को तीव्र करती है। शान्त और गृहस्थ कार्य टालना बेहतर।

शनिवार

Saturday — Shani Vara

  • नया व्यवसाय आरम्भ (सोम/गुरु/शुक्र श्रेष्ठ)
  • विवाह और सगाई
  • बड़े चिकित्सीय उपचार
  • नई साधना प्रारम्भ

शनि वार सर्वार्थसिद्धि श्रम और नींव कार्यों के लिए शुभ है, किंतु शास्त्र उत्सवों से बचने की सलाह देते हैं, क्योंकि शनि की ऊर्जा उत्सव से अधिक धैर्य को बढ़ावा देती है।

सामान्य

General Precautions

  • लग्न कुण्डली स्वतंत्र रूप से देखें
  • योग खिड़की में राहुकाल से बचें
  • मृत्यु योग की सहवर्तिता जाँचें
  • चंद्रमा अस्त न हो — सत्यापित करें

सर्वार्थसिद्धि आधारभूत योग है, सर्वोपरि गारंटी नहीं। शास्त्रीय मुहूर्त में तिथि, करण, 27-विध योग, होरा और लग्न का भी विचार होता है। इसे प्राथमिक फिल्टर के रूप में प्रयोग करें।

योग तुलना

प्रमुख मुहूर्त योगों की तुलना

योगआधारअवधिश्रेष्ठ कार्यआवृत्ति
सर्वार्थसिद्धियह पृष्ठचंद्रमा विशेष नक्षत्र में अनुकूल वार परसूर्योदय → नक्षत्र निकाससभी उद्देश्य4–6× / माह
अमृतसिद्धिचंद्रमा विशेष नक्षत्र में अनुकूल वार पर (भिन्न मैट्रिक्स)सूर्योदय → नक्षत्र निकासस्वास्थ्य, आध्यात्म4–6× / माह
रवि योगचंद्रमा वार स्वामी के स्वनक्षत्र में उसी वारसूर्योदय → नक्षत्र निकासशासन, सरकार, सौर1–2× / माह
अभिजित मुहूर्तदिन का 8वाँ मुहूर्त (मध्याह्न ~48 मिनट)~24–48 मिनट दैनिकशीघ्र आरम्भप्रतिदिन (बुध छोड़कर)
गुरु पुष्यचंद्रमा पुष्य नक्षत्र में गुरुवार कोसूर्योदय → पुष्य निकासशिक्षा, स्वर्ण, धन~1× / माह

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शास्त्रीय प्रश्नोत्तर

हाँ। पंचांग योग अलग-अलग तत्वों से बनते हैं। सर्वार्थसिद्धि वार-नक्षत्र पर आधारित है, जबकि मृत्यु योग तिथि-वार-नक्षत्र के संयोग से बनता है। दोनों का एक साथ होना संभव है। ऐसे में लग्न कुण्डली देखकर अंतिम निर्णय करें।

अवश्य। सर्वार्थसिद्धि योग दिन की शुभता की आधारशिला है, किंतु यह स्वयं में पूर्ण मुहूर्त नहीं है। मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार लग्न पर मंगल-शनि की दृष्टि न हो और लग्नेश षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में न हो।

शास्त्रों में भिन्न मत हैं। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार नीच चंद्रमा किसी भी पंचांग योग की फलदायिता को कम करता है। किंतु मुहूर्त चिंतामणि कहता है कि यदि वृश्चिक के अनुकूल नक्षत्र (विशाखा या ज्येष्ठा) में चंद्रमा हो तो सांसारिक कार्यों के लिए योग फलदायी रहता है।

पितृ तर्पण अमावास्या, महालय पक्ष या पुण्यतिथि पर शास्त्रसम्मत है। सर्वार्थसिद्धि योग इसमें बाधक नहीं है। धर्मसिंधु के अनुसार पितृ कर्म मुख्यतः तिथि (विशेषकर अमावास्या) पर निर्भर है; सर्वार्थसिद्धि इसे और शुभ बनाती है।

जब सर्वार्थसिद्धि योग अमावास्या को पड़े, यह पितृ पूजा और दीर्घकालीन साधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। ऐसा संयोग वर्ष में 2–3 बार होता है और परम्परागत पंचांगों में विशेष रूप से उल्लिखित होता है।

ज्योतिष शास्त्र धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों पर समान रूप से लागू होता है। "सर्वार्थसिद्धि" का अर्थ ही है "सभी उद्देश्यों की सिद्धि।" व्यापार पंजीकरण, सम्पत्ति लेनदेन, चिकित्सा प्रक्रियाएँ — सभी के लिए यह शुभ माना जाता है।

सर्वार्थसिद्धिः सर्वदा

सदा सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हों

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सर्वार्थसिद्धि योग हमें स्मरण कराता है कि ब्रह्माण्ड स्वयं अवसर की खिड़कियाँ बनाता है — वे क्षण जब ग्रहों की शक्तियाँ हमारे प्रयासों का समर्थन करने के लिए एक-रेखीय हो जाती हैं। काल को समझकर और शुभ समय में कार्य आरम्भ करके हम प्राचीन वैदिक मुहूर्त शास्त्र में वर्णित काल-नृत्य के सचेत सहभागी बनते हैं।

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