परिभाषा · Definition
सर्वाधिक सुलभ सौर योग · वर्ष में ~13 दिन
रवि-पुष्य योग तब बनता है जब सूर्य स्वयं पुष्य नक्षत्र (3°20\' – 16°40\' कर्क, नाक्षत्रिक) से गुजरता है। यह एकमात्र सौर-आधारित पुष्य योग है। चूँकि सूर्य कभी वक्री नहीं होता, यह प्रतिवर्ष एक बार ~13 लगातार दिन चलता है।
गुरु पुष्य (प्रतिमाह), रवि पुष्य (वार्षिक), और गुरु-पुष्य योग (12 वर्षों में एक बार) में यह मध्यम दुर्लभता का योग है — पर्याप्त रूप से दुर्लभ, पर्याप्त रूप से लम्बा। यह प्रत्येक वर्ष सूर्य की पुष्य में वापसी पर अनुभव की जाने वाली वैश्विक सुलभता है।
श्रेष्ठ कार्य
पुष्य योग की तुलना
आगामी परिक्रमण काल
रवि पुष्य योग 2026–2030
शुभ कार्य
रवि पुष्य में क्या करें
- ▸स्वर्ण आभूषण खरीदना
- ▸मूल्यवान वस्तुएँ
- ▸सोने के सिक्के
- ▸हीरे और रत्न
- ▸विद्यारम्भ
- ▸गुरु दीक्षा
- ▸परीक्षा प्रारम्भ
- ▸अध्ययन संकल्प
- ▸पद ग्रहण
- ▸सरकारी नियुक्ति
- ▸कम्पनी स्थापना
- ▸प्राधिकरण कार्य
- ▸मंत्र दीक्षा
- ▸व्रत आरम्भ
- ▸पूजा संकल्प
- ▸तीर्थयात्रा
- ▸उपचार आरम्भ
- ▸औषध सेवन शुरू
- ▸योग अभ्यास
- ▸आयुर्वेद उपचार
- ▸निवेश
- ▸बैंक खाता
- ▸व्यापारिक समझौते
- ▸सम्पत्ति खरीद
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शास्त्रीय प्रश्नोत्तर
रवौ पुष्ये सर्वसिद्धिः
सूर्य और पुष्य के मिलन में सब सिद्ध हो
रवि-पुष्य योग में प्रत्येक वर्ष सूर्य उस नक्षत्र में लौटता है जो देवगुरु बृहस्पति की भूमि है। यह वह वार्षिक क्षण है जब सौर संप्रभुता और ब्रह्माण्डीय पोषण एक साथ एकीकृत होते हैं — नेतृत्व, विद्या और आत्मज्ञान के लिए एक अद्वितीय अवसर।
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